चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और विशेष मानी जाती है। इस दिन एक ओर मां सिद्धिदात्री (नवरात्रि का नौवां स्वरूप) की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव—रामनवमी—पूरे देश में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
भगवान श्रीराम, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, का जन्म त्रेतायुग में अयोध्या नगरी में राजा दशरथ के यहां हुआ था। इस दिन अयोध्या सहित पूरे भारत में विशेष पूजा, भजन और उत्सव आयोजित किए जाते हैं।
2026 में रामनवमी की तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम बना हुआ है क्योंकि नवमी तिथि दो दिनों तक पड़ रही है।
👉 हिंदू परंपरा में अधिकांश व्रत उदय तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, इसलिए कई लोग 27 मार्च को रामनवमी मनाएंगे।
👉 लेकिन शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न (दोपहर) में हुआ था, इसलिए जिस दिन नवमी तिथि दोपहर में हो—वही दिन अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
✅ इस आधार पर राम जन्मोत्सव 26 मार्च 2026 को मनाना श्रेष्ठ रहेगा।
धार्मिक ग्रंथों जैसे धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु में स्पष्ट उल्लेख है:
“नवमी तिथि के मध्याह्न काल में ही श्रीराम का जन्मोत्सव मनाना चाहिए।”
इसी प्रकार रामचरितमानस के बालकांड में भी भगवान राम के जन्म का वर्णन मिलता है:
“चैत्र मास की नवमी तिथि को रघुवंश के श्रेष्ठ श्रीराम का जन्म हुआ।”
और उस समय:
यह सभी योग भगवान राम के दिव्य अवतार को दर्शाते हैं।
रामनवमी के दिन विधिपूर्वक पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आप इस सरल विधि को अपनाएं:
रामनवमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है: