शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है। वे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। कई लोग शनि के प्रभाव को कम करने के लिए दान और जाप करते हैं, लेकिन अक्सर समय और विधि की जानकारी न होने के कारण अच्छे परिणाम की जगह नकारात्मक असर झेलना पड़ता है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार शनि की उपासना करते समय सही नियमों का पालन करना बेहद ज़रूरी है।
शनि का दान दिन में नहीं किया जाता।
दान का श्रेष्ठ समय शाम 6:30 बजे के बाद माना गया है।
दिन में शनि दान करने से जीवन में बाधाएँ और परेशानियाँ बढ़ सकती हैं।
अक्सर लोग सुनकर शनि मंत्र का जाप स्वयं करना शुरू कर देते हैं — “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”। लेकिन शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शनि का जाप स्वयं नहीं करना चाहिए।
शनि मंत्र का जाप सिर्फ ब्राह्मण द्वारा दक्षिणा देकर करवाना चाहिए।
स्वयं जाप करने से उल्टा प्रभाव हो सकता है।
शनि न्यायप्रिय देवता हैं। सही नियमों से की गई उपासना जीवन में स्थिरता, सफलता और धन वृद्धि लाती है। लेकिन अगर नियम तोड़े जाएं तो इसके दुष्परिणाम तुरंत दिखाई देने लगते हैं।